सेनुरन मुत्तुसामी ने गुवाहाटी में भारत के खिलाफ बनाया पहला टेस्ट शतक

सेनुरन मुत्तुसामी ने गुवाहाटी में भारत के खिलाफ बनाया पहला टेस्ट शतक
23/11

गुवाहाटी के बारसपरा स्टेडियम पर एक ऐसा पल आया, जिसने न सिर्फ दक्षिण अफ्रीका की क्रिकेट टीम को जीत की ओर धकेला, बल्कि एक युवा खिलाड़ी के दिल में जिंदगी भर का बोझ उतार दिया। सेनुरन मुत्तुसामी, 31 साल के इस दक्षिण अफ्रीकी ऑलराउंडर ने 23 नवंबर, 2025 को भारत के खिलाफ अपना पहला टेस्ट शतक बनाया — 109 रन, 192 गेंदों में, 10 चौकों और 2 छक्कों के साथ। ये शतक केवल एक सांख्यिकी नहीं था, बल्कि एक दशक के संघर्ष, संदेह और आत्म-संशय का विजयी अंत था।

शुरुआत तो शानदार थी, लेकिन भारत ने उसे तोड़ दिया

मुत्तुसामी की टेस्ट शुरुआत 2 अक्टूबर, 2019 को विशाखापत्तनम में हुई थी, जहां उसने भारत के कप्तान विराट कोहली को कैच एंड बोल्ड करके अपना पहला टेस्ट विकेट लिया। तब तो सबने कहा — ये नया नाम बड़ा बनेगा। लेकिन जब वह दूसरे टेस्ट में भी खेला, तो उसका प्रदर्शन बिल्कुल निराशाजनक रहा — सिर्फ दो विकेट। उस समय उसने NDTV Sports को बताया, "2019 के भारत दौरे के बाद मुझे लगा कि मैं यहां कभी टेस्ट मैच नहीं खेलूंगा।"

उसकी आत्मा में एक धुंध छा गई। दक्षिण अफ्रीका के घरेलू क्रिकेट में वह लगातार अच्छा खेल रहा था — डॉलफिन्स के लिए बल्लेबाजी करते हुए, फिर धीरे-धीरे गेंदबाजी में भी निपुण बनते हुए। लेकिन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर, वह एक अनजान नाम बन गया। पहले उसे स्पिन कैंप में बुलाया गया, फिर साउथ अफ्रीका ए के लिए भारत दौरे पर भेजा गया, लेकिन टीम में जगह नहीं मिली।

पाकिस्तान में बदला अंदाज़

फिर आया 2025 का फरवरी। दक्षिण अफ्रीका की टीम पाकिस्तान के दौरे पर गई। वहां मुत्तुसामी ने अपनी गेंदबाजी के साथ-साथ बल्लेबाजी का भी जादू दिखाया। पहले टेस्ट में 11 विकेट, दूसरे में 89 अप्रून। ये दो प्रदर्शन उसके लिए एक टर्निंग पॉइंट बन गए। उसने समझ लिया — भारतीय गेंदबाज जो भी उसके खिलाफ खेलते हैं, उनकी गेंदों का जवाब उसके बल्ले से देना है। वह अब सिर्फ एक ऑलराउंडर नहीं, बल्कि एक ऐसा खिलाड़ी बन चुका था जो भारतीय मैदान पर भी जीत सकता है।

इसी तरह, उसका नाम भारत के खिलाफ टेस्ट सीरीज के लिए टीम में आया। उसने ओडीआई डेब्यू भी कर लिया था — तीन देशों के बीच हुए ट्राई सीरीज में। लेकिन जब उसने गुवाहाटी के मैदान पर पहली बार बल्लेबाजी के लिए उतरा, तो उसके चेहरे पर डर नहीं, बल्कि एक शांत दृढ़ता थी।

गुवाहाटी का वो दिन, जब इतिहास बना

दूसरे टेस्ट के दूसरे दिन, मुत्तुसामी ने 25 रन से शुरुआत की। उसके साथ काइल वर्रेन ने एक शांत, लेकिन अत्यंत प्रभावी साझेदारी की। फिर मार्को जैनसन आए — जिन्होंने 93 रन बनाए। दोनों की जोड़ी ने भारतीय गेंदबाजों को बिल्कुल फ्रस्ट्रेट कर दिया।

लंच के बाद, मुत्तुसामी ने अपना शतक पूरा किया — भारतीय गेंदबाज मोहम्मद सिराज की गेंद पर दो रन। बारसपरा स्टेडियम चीख उठा। भारतीय दर्शकों ने उसे तालियां दीं — न सिर्फ एक दक्षिण अफ्रीकी खिलाड़ी के लिए, बल्कि एक तमिल वंशज के लिए, जिसके परिवार की जड़ें नागपट्टिनम, तमिलनाडु में हैं।

"ये एक वास्तविक खास पल था, इतने भीड़ वाले स्टेडियम में," मुत्तुसामी ने The Indian Express को बताया। उसकी आंखों में आंसू थे। उसके बाद उसे 109 रन पर आउट कर दिया गया, लेकिन दक्षिण अफ्रीका की टीम ने 489 रन बना लिए।

क्यों ये शतक इतना खास है?

क्यों ये शतक इतना खास है?

भारत के खिलाफ टेस्ट मैच में शतक बनाना ही कठिन है। लेकिन एक ऐसे खिलाड़ी के लिए, जिसने यहां अपनी पहली बार खेलते हुए भारतीय टीम के खिलाफ विकेट लिया था, और फिर दो साल तक भारत के खिलाफ खेलने के बारे में सोचना भी बंद कर दिया था — ये शतक एक जीत नहीं, एक पुनर्जागरण है।

उसकी व्यक्तिगत कहानी भी अनोखी है। उसने क्रिकेट के साथ-साथ मीडिया और मार्केटिंग की डिग्री पूरी की। उसने अपने खेल को एक व्यवसाय की तरह नहीं, बल्कि एक जीवन की तरह जिया। उसके लिए ये शतक सिर्फ रनों का जमाव नहीं, बल्कि एक बच्चे के वादे का पूरा होना था — जिसने अपने घर के बाहर अपनी पहचान बनाने का साहस किया।

अगला कदम: भारत के खिलाफ 25 साल बाद टेस्ट सीरीज जीतना

दक्षिण अफ्रीका ने 1999 के बाद भारत में कभी टेस्ट सीरीज नहीं जीती। अगर ये टीम अगले टेस्ट में भी अच्छा प्रदर्शन करती है, तो ये ऐतिहासिक जीत हो सकती है। और उसकी नींव यहीं रखी गई है — सेनुरन मुत्तुसामी के शतक ने।

क्या ये अंतिम जीत है?

क्या ये अंतिम जीत है?

नहीं। ये एक नया शुरुआत है। अब वह दक्षिण अफ्रीका की टीम का अनिवार्य हिस्सा है। उसके बाद ऑस्ट्रेलिया, इंग्लैंड के दौरे आ रहे हैं। अगर वह अपनी बल्लेबाजी को बरकरार रखता है, तो उसका नाम दक्षिण अफ्रीका के स्पिन-ऑलराउंडर्स की लंबी सूची में शामिल हो जाएगा — जिसमें जॉन डेविसन, जॉन बेल्ले और राशिद खान जैसे नाम हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सेनुरन मुत्तुसामी का भारतीय वंश क्या है?

मुत्तुसामी के परिवार की जड़ें तमिलनाडु के नागपट्टिनम जिले में हैं। उनके पूर्वज दक्षिण भारत से दक्षिण अफ्रीका के डर्बन शहर में पहुंचे थे, जहां वे चीनी और तमिल समुदाय के साथ मिलकर बसे। यह उनकी विरासत उनके नाम और उनके बल्लेबाजी स्टाइल में भी झलकती है — शांत, तकनीकी और अत्यधिक धैर्यवान।

2019 के भारत दौरे के बाद उन्हें क्यों बाहर कर दिया गया?

2019 में उन्होंने सिर्फ दो विकेट लिए और बल्लेबाजी में भी कोई योगदान नहीं दिया। भारतीय टीम के लिए बल्लेबाजी करना बहुत अलग होता है — गेंदबाजों की चाल और मैदान की बारीकियां अलग होती हैं। उस समय उनकी बल्लेबाजी अभी भी अपरिपक्व थी, और उन्हें दक्षिण अफ्रीका की टीम ने अन्य ऑलराउंडर्स को प्राथमिकता दी।

पाकिस्तान के दौरे ने उनकी बल्लेबाजी को कैसे बदला?

पाकिस्तान में उन्होंने देखा कि भारतीय गेंदबाजी की तरह गेंद घूमती है, लेकिन बल्लेबाजी के लिए जगह अधिक है। उन्होंने अपने बल्ले को गेंद की गति के अनुसार ढाल दिया — बाहर की गेंदों को ड्राइव करने की जगह, अंदर की गेंदों को लेट कर खेलना सीखा। यही तकनीक उन्हें गुवाहाटी में शतक बनाने में मदद की।

क्या ये उनकी अंतिम शानदार प्रतिभा है?

नहीं। उन्होंने पहले भी बहुत बार अपनी क्षमता दिखाई है — 2022 में एकदिवसीय क्रिकेट में शतक बनाया था, और घरेलू टूर्नामेंट में लगातार अच्छा प्रदर्शन किया। अब उनके लिए एक नया लक्ष्य है — भारत के खिलाफ टेस्ट में दो शतक बनाना। अगर वह ऐसा कर देते हैं, तो वे दक्षिण अफ्रीका के इतिहास में अपनी जगह बना लेंगे।

भारतीय दर्शकों ने उन्हें क्यों तालियां दीं?

क्योंकि उन्होंने अपनी जड़ों को भूला नहीं। उनका नाम तमिल है, उनके परिवार की जड़ें तमिलनाडु में हैं, और उन्होंने भारतीय मैदान पर एक अच्छा खेल खेला। भारतीय दर्शक अक्सर ऐसे खिलाड़ियों को स्वीकार कर लेते हैं, जो अपने वंश को नहीं छिपाते। ये तालियां उनके लिए नहीं, बल्कि उनकी जड़ों के लिए थीं।

अगला टेस्ट कब होगा और क्या दक्षिण अफ्रीका जीत सकता है?

अगला टेस्ट 27 नवंबर को गुवाहाटी में होगा। दक्षिण अफ्रीका के पास अब बड़ी बल्लेबाजी और तीन अनुभवी गेंदबाज हैं। अगर भारत की टीम तेजी से आउट हो जाती है, तो ये सीरीज दक्षिण अफ्रीका के नाम हो सकती है — जो 25 साल बाद होगा। और उसकी कहानी का शुरुआती पन्ना अब सेनुरन मुत्तुसामी के शतक से लिखा जा चुका है।